Tuesday, December 9, 2008

क्रिसमस के तोहफ़े- बाल-कविता





देखो-देखो बरफ़ गिरी है
कितनी प्यारी मखमल सी है
बर्फ़ के गुड्डे मन को भायें
चलो सभी के संग बनायें
गोल-मोल से लगते प्यारे
गाजर नाक लगाये सारे
आया जो क्रिसमस का मौसम
घर बाहर को कर दें रोशन
राजू क्यों है आज उदास
आओ चल कर पूछें पास
मम्मी बोली उसकी अब के
होंगे नहीं क्रिसमस पे तोहफ़े
उसने मां को खू़ब सताया
इसीलिये ये दंड है पाया
सैन्टा उनको तोहफ़ा देते
मम्मी का जो कहना सुनते
हम अच्छे बच्चे बन जायें
सुंदर-सुंदर तोहफ़े पायें

5 comments:

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

हम अच्छे बच्चे बन जायें
सुंदर सुंदर तोहफ़े पायें


बहुत सुंदर! कविता पढ़कर फ़िर से बचपन में जाने को दिल किया!

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत सुंदर लगी यह कविता

विनय said...

मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

-----नयी प्रविष्टि
आपके ब्लॉग का अपना SMS चैनल बनायें
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

दीनदयाल शर्मा said...

कविता बहुत ही प्यारी है...पढ़ कर मजा आ गया...एक पंक्ति में.....इसीलिए ये दंड है पाया...यानी इस पंक्ति में आप.... है ... लगाना भूल गये शायद...बधाई... मैंने आपके ब्लॉग को मेरे ब्लॉग से लिंक भी कर रखा है.. http://deendayalsharma.blogspot.com

Rajesh Chitkara said...
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