Thursday, November 13, 2008

बाल दिवस पर: रम-पल-स्टिल्ट-स्किन- पहला भाग


बहुत दिनों पहले की बात है। किसी देश में एक ग़रीब किसान एक गाँव में रहता था। उसकी एक सुंदर बेटी थी। एक दिन किसान कुछ पैसे बनाने के लालच में, उस देश के राजा के पास गया और कहा कि उसकी बेटी भूसे को कात कर सोना बना सकती है। राजा ने किसान से ख़ुश हो कर उसे अपनी बेटी को महल ले आने का आदेश दिया और कहा कि अगर उसकी बेटी सच में ऐसा कर सकती है तो वो उस से शादी कर लेगा, मगर अगर ये झूठ निकला तो वो बेटी और पिता दोनों का सर कलम करवा देगा।


किसान अपनी बेटी को महल ले गया। राजा ने एक बड़े से भूसे से भरे कमरे में उस लड़की को भेज दिया जहाँ एक चरखा भी रखा था। किसान की बेटी को कुछ पता नहीं था कि वो क्या करे। जान चले जाने के डर से वो कुछ कह भी नहीं पाई। बंद कमरे में वो रोती रही। रात के बारह बजे अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला और एक बौना आदमी अंदर आया। उसे देख कर किसान की बेटी डर गई मगर बौने ने उसे ढाँढस बँधाया और उससे उसके रोने का कारण पूछा। रोते रोते किसान की बेटी ने सारी बात बताई और कहा कि उसे भूसे से सोना बनाना नहीं आता। तब बौने आदमी ने उससे पूछा कि अगर वो सारे भूसे को सोना बना दे तो उसे क्या मिलेगा। किसान की बेटी ने अपनी उंगली मॆं पहनी हुई अंगूठी को उस बौने को दे देने का वादा किया। तब बौने ने सारी रात चरखे पर काम कर के भूसे को सोने में बदल दिया और सुबह लड़की से अंगूठी ले कर चला गया।


अगली सुबह राजा कमरे में सोना देख कर फूला नहीं समाया। मगर उसके मन में लालच आ गया और उसने किसान की बेटी को एक भूसे से भरा और भी बड़ा कमरा दिया और सारे भूसे को फिर से सोने में बदलने को कहा। किसान की बेटी अब फिर मुसीबत भाँप कर रोने लगी। रात के ठीक बारह बजे, फिर दरवाज़ा खुला और बौना प्रकट हुआ। इस बार लड़की के गले के हार के बदले बौने ने उसका काम करने का वादा किया।

अगली सुबह राजा सोना देख कर बहुत ख़ुश हुआ और किसान की बेटी को एक और भूसे से भरे बड़े कमरे में ले गया। इस बार उसने लड़की से वादा किया कि अगर वो इस सारे भूसे को सोने में बदल दे तो वो कल ही उस से शादी कर लेगा। किसान की बेटी कमरे में बंद हो कर रात के बारह बजे का इंतज़ार करने लगी।

रात के ठीक बारह बजे बौना प्रकट हुआ। उसने किसान की बेटी से फिर वही सवाल किया, " तुम मुझे इस काम के बदले क्या दोगी?" किसान की बेटी के पास और कुछ बाक़ी नहीं था। उसने कहा." मेरे पास अब और कुछ नहीं"। तब बौने ने कहा," ठीक है, फिर जब तुम्हारी राजा से शादी हो जायेगी, तब तुम मुझे अपना पहला बेटा दे देना।" किसान की बेटी ने झट मान लिया। उसे तब मां की ममता का अहसास नहीं था। अपनी जान बचाना उसे उस समय ज़्यादा ज़रूरी लगा। सारी रात बौने ने चरखे पर काम किया और उस कमरे में रखे सारे भूसे को सोने में बदल दिया और सुबह एक साल बाद फिर आने का वादा कर के चला गया।


अगले दिन सुबह राजा सोना देख कर बहुत ख़ुश हुआ और उसने किसान की बेटी से शादी कर ली...


7 comments:

Tarun said...

आगे का इंतजार है, ऐसा लगता है इस कहानी को सुना या पढ़ा है। बेटा होने पर वो बेटा देने को तैयार नही होती है ना

shama said...

Swagat hai...! Kahanee padhke, halaanki antkaa andaza lagaya jaa saktaa hai, phirbhi padhneme bachhonka sa aanad mila, aur aglee kadeeka intezaarbhi hone laga hai..!
Mere blogpe aaneka snehil nimantran..!
Baldiwaske uplakshyame ye kahanee badee mayne rakhtee hai...aur parikathaonki ek apneehi sundar duniya hotee hai...kalpana udaan bhartee hai...bina rok tok ke !

Abhishek said...

बहुत अच्छा प्रयास शुरू किया है आपने, वो भी बाल-दिवस से. शुभकामनाएं. निरंतरता बनाये रखें. स्वागत अपनी धरोहर को समर्पित मेरे ब्लॉग पर भी.

नारदमुनि said...

jaa jawani tu jaa mere pachapan ko ye aa, ja we ja tanu rabb da wasta
narayan narayan

jayaka said...

kahaani bahut achchhi hai; aage ka intejaar hai!

Amit K. Sagar said...

very Nice. keep it up. ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. खूब लिखें, खूब पढ़ें, स्वच्छ समाज का रूप धरें, बुराई को मिटायें, अच्छाई जगत को सिखाएं...खूब लिखें-लिखायें...
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आप मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं.
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अमित के. सागर
(उल्टा तीर)

रचना गौड़ ’भारती’ said...

noce efforts for children
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
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